भगवद् गीता 1.1: अध्याय 1, श्लोक 1

Apr 10, 2026
174 Views
bhagavad-gita-chapter-1-shloka-1

धृतराष्ट्र उवाच:
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥1॥

Dhritarashtra said:
Dharmakshetre Kurukshetre samaveta yuyutsavah।
Mamakah Pandavas chaiva kim akurvata Sanjaya॥

Meaning:

धृतराष्ट्र कहते हैं:
हे संजय! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में युद्ध की इच्छा से एकत्र हुए मेरे पुत्र और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?

Dhritarashtra said:
“O Sanjaya, after assembling on the holy land of Kurukshetra and desiring to fight, what did my sons and the sons of Pandu do?”

🌍 Real Life Meaning

यह श्लोक सिर्फ युद्ध के बारे में नहीं है, बल्कि मानव मन की स्थिति को दर्शाता है।

👉 धृतराष्ट्र अंधे थे — यह अज्ञान (ignorance) का प्रतीक है
👉 “मेरे पुत्र” (मामकाः) — यह attachment (मोह) दिखाता है

💡 आज के जीवन में हम अक्सर सही और गलत जानते हुए भी पक्षपात करते हैं, अपने लोगों के लिए गलत को भी सही ठहराते हैं निर्णय लेते समय emotion vs dharma का संघर्ष होता है

📚 Moral Story

एक कंपनी में दो कर्मचारी थे — राहुल और अमित।

राहुल मेहनती और ईमानदार था, जबकि अमित बॉस का रिश्तेदार था।
जब प्रमोशन का समय आया, तो बॉस ने योग्य राहुल की जगह अमित को चुन लिया।
कुछ महीनों बाद, अमित की गलतियों से कंपनी को भारी नुकसान हुआ।
👉 तब बॉस को समझ आया कि उसने धर्म (सही निर्णय) की जगह मोह (attachment) को चुना।

💡 Key Takeaway

👉 मोह (attachment) हमारे निर्णय को कमजोर बना देता है
👉 हमेशा धर्म (सही और न्यायपूर्ण रास्ता) को चुनें, चाहे वह कठिन ही क्यों न हो

Comments (0)

0/140

No comments yet. Be the first to share your thoughts!

More from author
» Read more

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

📖 Sanskrit Shloka सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः। (नोट: यह पंक्ति श्लोक 6 का भी भाग है, पर संदर्भ में पुनः उल्लेख होता है) Saubhadro Draupadeyash c...

Mar 27, 2026 86 reads
भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

📖 Sanskrit Shloka काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः।धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः॥17॥ Kashyash cha parameshvasah Shikhandi cha maharathah।D...

Mar 27, 2026 60 reads
भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

📖 Sanskrit Shloka अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः।नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ॥16॥ Anantavijayam raja Kunti-putro Yudhishthirah।Nakulah Sahadeva...

Mar 27, 2026 84 reads
भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

📖 Sanskrit Shloka पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः।पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदरः॥15॥ Panchajanyam Hrishikesho Devadattam Dhananjayah।Paundram...

Mar 27, 2026 64 reads
भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

📖 Sanskrit Shloka ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ।माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शंखौ प्रदध्मतुः॥14॥ Tatah shvetair hayair yukte mahati syandane st...

Mar 27, 2026 53 reads

Most Popular Bhajans

मोहन से दिल क्यों लगाया है ये मैं जानू या वो जाने भजन
263 reads

मोहन से दिल क्यों लगाया है ये मैं जानू या वो जाने भजन

मोहन से दिल क्यूँ लगाया है, ये मैं जानू या वो जानेछलिया से दिल क्यूँ लगाया है, ये मैं जानू या वो जाने ॥ हर बात निराली है उसकी, हर बात में है इक टेढापनटेढ़े ...

वृंदावन की गलियों में राधे राधे गूंजे
180 reads

वृंदावन की गलियों में राधे राधे गूंजे

वृन्दावन की कुञ्ज गली में मैं राधे राधे गाउंगी,मैं तो श्यामा श्यामा गाउंगी, पहले मैं बरसाने जाऊ,श्याम श्यामा के दर्शन पाउ,फिर वृन्दावन जाउंगी  राधे राध...

भगवद् गीता 1.1: अध्याय 1, श्लोक 1
174 reads

भगवद् गीता 1.1: अध्याय 1, श्लोक 1

धृतराष्ट्र उवाच:धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥1॥ Dhritarashtra said:Dharmakshetre Kurukshetre samaveta yuyu...

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ भजन
166 reads

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ भजन

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँबड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ पावन ज्योति की लागे कतार माई तोरे मंदिरवा माँबड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदि...

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ भजन
155 reads

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ भजन

दुर्गा है मेरी माँ,अम्बे है मेरी माँ।। जय बोलो जय माता दी, जय हो,जो भी दर पे आए, जय हो,वो खाली ना जाए, जय हो, सबके काम है करती, जय हो,सबके दुखड़े हरती, जय ह...

Keep Exploring

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

📖 Sanskrit Shloka सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः। (नोट: यह पंक्ति श्लोक 6 का भी भाग है, पर संदर्भ में पुनः उल्लेख होता है) Saubhadro Draupadeyash c...

भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

📖 Sanskrit Shloka काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः।धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः॥17॥ Kashyash cha parameshvasah Shikhandi cha maharathah।D...

भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

📖 Sanskrit Shloka अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः।नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ॥16॥ Anantavijayam raja Kunti-putro Yudhishthirah।Nakulah Sahadeva...

भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

📖 Sanskrit Shloka पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः।पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदरः॥15॥ Panchajanyam Hrishikesho Devadattam Dhananjayah।Paundram...

भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

📖 Sanskrit Shloka ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ।माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शंखौ प्रदध्मतुः॥14॥ Tatah shvetair hayair yukte mahati syandane st...