श्रीमद्भगवद्गीता

श्रीमद्भगवद्गीता हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महान ग्रंथ है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेशों का वर्णन है। यह ग्रंथ जीवन के हर पहलू—धर्म, कर्म, भक्ति और मोक्ष—का मार्गदर्शन करता है। गीता के श्लोक मनुष्य को सही कर्म करने, आत्मा की शुद्धि और भगवान में आस्था रखने की प्रेरणा देते हैं।

अध्याय

अध्याय 1: अर्जुन विषाद योग

श्लोक

अध्याय 2: सांख्य योग

श्लोक

अध्याय 3: कर्म योग

श्लोक

अध्याय 4: ज्ञान कर्म संन्यास योग

श्लोक

अध्याय 5: कर्म संन्यास योग

श्लोक

अध्याय 6: ध्यान योग

श्लोक

अध्याय 7: ज्ञान विज्ञान योग

श्लोक

अध्याय 8: अक्षर ब्रह्म योग

श्लोक

अध्याय 9: राज विद्या राज गुह्य योग

श्लोक

अध्याय 10: विभूति योग

श्लोक

अध्याय 11: विश्वरूप दर्शन योग

श्लोक

अध्याय 12: भक्ति योग

श्लोक

अध्याय 13: क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभाग योग

श्लोक

अध्याय 14: गुणत्रय विभाग योग

श्लोक

अध्याय 15: पुरुषोत्तम योग

श्लोक

अध्याय 16: दैवासुर संपद विभाग योग

श्लोक

अध्याय 17: श्रद्धात्रय विभाग योग

श्लोक

अध्याय 18: मोक्ष संन्यास योग

श्लोक

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