होरी खेलन पधारो श्री वृन्दावन में - होली भजन
यह आनंदमय कृष्ण होली भजन श्री राधा-कृष्ण की ब्रज की होली की झलक प्रस्तुत करता है। वृन्दावन की गलियों में रंग, प्रेम और भक्ति का अद्भुत संगम इस भजन में दिखाई देता है। इसमें बसंत ऋतु की सुंदरता, गोपियों का उल्लास और नंदलाल की रंग भरी लीलाओं का वर्णन किया गया है, जो हर भक्त के मन को आनंदित कर देता है।
🔶 Bhajan Lyrics:
होरी खेलन पधारो श्री वृन्दावन में
श्यामा खेलन पधारो श्री वृन्दावन में
राधे खेलन पधारो श्री वृन्दावन में
श्री वृन्दावन में, श्री मधुबन में
आयी बसंत बहार, करे कोयल पुकार
करे रंगन फुहार, श्री वृन्दावन में
करके सोलह सृंगार। और मिलके ब्रिज नार
गावे होरी की धमार, श्री वृन्दावन में
लिए हाथन गुलाल मारी पिचकारी की धार
रंग सो रंग दियो नन्द कुमार, श्री वृन्दावन में
🔶 भजन का अर्थ:
यह भजन श्री वृन्दावन की होली के दिव्य और आनंदमय वातावरण का वर्णन करता है। इसमें भक्त प्रभु श्रीकृष्ण, राधा और श्यामा को वृन्दावन में होली खेलने के लिए आमंत्रित करता है। बसंत ऋतु के आगमन के साथ ही पूरा वातावरण रंगों और उल्लास से भर जाता है।
भजन में गोपियों के सोलह श्रृंगार और उनके मिलकर होली गाने का दृश्य प्रस्तुत किया गया है। नंद कुमार श्रीकृष्ण अपने हाथों में गुलाल और पिचकारी लेकर सभी को प्रेम और रंगों में रंग देते हैं, जो उनके प्रेम और लीलाओं का प्रतीक है।
अंत में, यह भजन हमें बताता है कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह प्रेम, भक्ति और एकता का प्रतीक है, जहाँ भक्त और भगवान एक हो जाते हैं।
🔶 FAQs:
1. यह भजन किस त्योहार से जुड़ा है?
यह भजन होली के त्योहार से जुड़ा हुआ है, जो श्रीकृष्ण की लीलाओं से संबंधित है।
2. इस भजन में किस स्थान का वर्णन है?
इस भजन में श्री वृन्दावन और मधुबन का वर्णन किया गया है, जहाँ राधा-कृष्ण होली खेलते हैं।
3. “नन्द कुमार” किसे कहा गया है?
नन्द कुमार भगवान श्रीकृष्ण को कहा जाता है, जो नंद बाबा के पुत्र हैं।