भगवद् गीता 1.8: अध्याय 1, श्लोक 8

Apr 10, 2026
28 Views
bhagavad-gita-chapter-1-shloka-8

📖 Sanskrit Shloka

भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिंजयः।
अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च॥8॥

Bhavan Bhishmash cha Karnash cha Kripash cha samitinjayah।
Ashwatthama Vikarnash cha Saumadattis tathaiva cha॥

Slok Meaning:

आप स्वयं (द्रोणाचार्य), भीष्म, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र (भूरिश्रवा) जैसे महान योद्धा हमारी सेना में उपस्थित हैं।

There are great warriors like yourself (Dronacharya), Bhishma, Karna, Kripa, Ashwatthama, Vikarna, and the son of Somadatta (Bhurishrava) present in our army.

🌍 Real Life Meaning:

यह श्लोक हमें सिखाता है कि किसी भी मजबूत संगठन या टीम में अनुभवी और शक्तिशाली व्यक्तियों का होना बहुत महत्वपूर्ण होता है। दुर्योधन अपने सेना के बड़े-बड़े योद्धाओं का नाम लेकर अपने आत्मविश्वास को मजबूत कर रहा है।

जीवन में भी, जब हमारे पास अनुभवी और सक्षम लोग होते हैं, तो हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है और हम बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

💡 आज के जीवन में:

  • experience और knowledge बहुत महत्वपूर्ण होते हैं

  • strong mentors और leaders सफलता दिलाते हैं

  • सही लोगों के साथ होने से confidence बढ़ता है

  • team में experienced लोगों का होना जरूरी है

  • guidance से मुश्किल काम भी आसान हो जाते हैं

📚 Moral Story:

एक नई कंपनी शुरू हुई, जिसमें कुछ युवा लोग थे लेकिन उनके पास अनुभव की कमी थी। शुरुआत में उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा।

फिर उन्होंने एक अनुभवी व्यक्ति को अपना advisor बनाया। उस व्यक्ति के अनुभव और मार्गदर्शन से उन्होंने अपनी गलतियों को सुधारा और सही दिशा में काम करना शुरू किया।

कुछ ही समय में कंपनी सफल हो गई। तब उन्हें समझ आया कि अनुभव और सही मार्गदर्शन कितने जरूरी होते हैं।

💡 निष्कर्ष:

अनुभव और सही मार्गदर्शन सफलता की मजबूत नींव होते हैं। सही लोगों के साथ होने से ही बड़ी जीत हासिल होती है।

Comments (0)

0/140

No comments yet. Be the first to share your thoughts!

More from author
» Read more

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

📖 Sanskrit Shloka सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः। (नोट: यह पंक्ति श्लोक 6 का भी भाग है, पर संदर्भ में पुनः उल्लेख होता है) Saubhadro Draupadeyash c...

Mar 27, 2026 34 reads
भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

📖 Sanskrit Shloka काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः।धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः॥17॥ Kashyash cha parameshvasah Shikhandi cha maharathah।D...

Mar 27, 2026 14 reads
भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

📖 Sanskrit Shloka अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः।नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ॥16॥ Anantavijayam raja Kunti-putro Yudhishthirah।Nakulah Sahadeva...

Mar 27, 2026 12 reads
भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

📖 Sanskrit Shloka पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः।पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदरः॥15॥ Panchajanyam Hrishikesho Devadattam Dhananjayah।Paundram...

Mar 27, 2026 17 reads
भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

📖 Sanskrit Shloka ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ।माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शंखौ प्रदध्मतुः॥14॥ Tatah shvetair hayair yukte mahati syandane st...

Mar 27, 2026 11 reads

Most Popular Bhajans

मोहन से दिल क्यों लगाया है ये मैं जानू या वो जाने भजन
119 reads

मोहन से दिल क्यों लगाया है ये मैं जानू या वो जाने भजन

मोहन से दिल क्यूँ लगाया है, ये मैं जानू या वो जानेछलिया से दिल क्यूँ लगाया है, ये मैं जानू या वो जाने ॥ हर बात निराली है उसकी, हर बात में है इक टेढापनटेढ़े ...

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ भजन
86 reads

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ भजन

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँबड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ पावन ज्योति की लागे कतार माई तोरे मंदिरवा माँबड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदि...

वृंदावन की गलियों में राधे राधे गूंजे
78 reads

वृंदावन की गलियों में राधे राधे गूंजे

वृन्दावन की कुञ्ज गली में मैं राधे राधे गाउंगी,मैं तो श्यामा श्यामा गाउंगी, पहले मैं बरसाने जाऊ,श्याम श्यामा के दर्शन पाउ,फिर वृन्दावन जाउंगी  राधे राध...

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ भजन
67 reads

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ भजन

दुर्गा है मेरी माँ,अम्बे है मेरी माँ।। जय बोलो जय माता दी, जय हो,जो भी दर पे आए, जय हो,वो खाली ना जाए, जय हो, सबके काम है करती, जय हो,सबके दुखड़े हरती, जय ह...

भगवद् गीता 1.1: अध्याय 1, श्लोक 1
63 reads

भगवद् गीता 1.1: अध्याय 1, श्लोक 1

धृतराष्ट्र उवाच:धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥1॥ Dhritarashtra said:Dharmakshetre Kurukshetre samaveta yuyu...

Keep Exploring

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

📖 Sanskrit Shloka सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः। (नोट: यह पंक्ति श्लोक 6 का भी भाग है, पर संदर्भ में पुनः उल्लेख होता है) Saubhadro Draupadeyash c...

भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

📖 Sanskrit Shloka काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः।धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः॥17॥ Kashyash cha parameshvasah Shikhandi cha maharathah।D...

भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

📖 Sanskrit Shloka अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः।नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ॥16॥ Anantavijayam raja Kunti-putro Yudhishthirah।Nakulah Sahadeva...

भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

📖 Sanskrit Shloka पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः।पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदरः॥15॥ Panchajanyam Hrishikesho Devadattam Dhananjayah।Paundram...

भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

📖 Sanskrit Shloka ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ।माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शंखौ प्रदध्मतुः॥14॥ Tatah shvetair hayair yukte mahati syandane st...