भगवद् गीता 1.12: अध्याय 1, श्लोक 12

Apr 10, 2026
12 Views
bhagavad-gita-chapter-1-shloka-12

📖 Sanskrit Shloka

तस्य संजनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः।
सिंहनादं विनद्योच्चैः शंखं दध्मौ प्रतापवान्॥12॥

Tasya sanjanayan harsham Kuru-vriddhah pitamahah।
Simhanadam vinadyocchaih shankham dadhmau pratapavan॥

Slok Meaning:

कौरवों के वृद्ध पितामह भीष्म ने दुर्योधन का उत्साह बढ़ाने के लिए सिंह की गर्जना के समान ऊँची ध्वनि से शंख बजाया।

The grandsire of the Kauravas, Bhishma, roared like a lion and blew his conch loudly, bringing joy and confidence to Duryodhana.

🌍 Real Life Meaning:

यह श्लोक हमें सिखाता है कि एक सच्चा leader केवल रणनीति नहीं बनाता, बल्कि अपनी टीम का मनोबल भी बढ़ाता है। भीष्म पितामह ने शंख बजाकर पूरी सेना में उत्साह और आत्मविश्वास भर दिया।

जीवन में भी, जब हम किसी कठिन परिस्थिति में होते हैं, तो हमें किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत होती है जो हमें motivate करे और आगे बढ़ने की शक्ति दे।

💡 आज के जीवन में:

* motivation से confidence बढ़ता है
* एक leader का काम केवल काम कराना नहीं, बल्कि inspire करना भी है
* सही समय पर encouragement बहुत जरूरी होता है
* positive energy से performance बेहतर होता है
* strong शुरुआत सफलता का आधार बनती है

📚 Moral Story:

एक स्कूल में वार्षिक खेल प्रतियोगिता होने वाली थी। एक छात्र बहुत अच्छा खिलाड़ी था, लेकिन प्रतियोगिता से पहले वह डर गया और उसने भाग लेने से मना कर दिया।

तब उसके खेल शिक्षक ने उसे समझाया और उसका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा, “तुम्हें जीतने से पहले खुद पर विश्वास करना होगा।”

शिक्षक की बात सुनकर छात्र ने भाग लिया और पूरी मेहनत से खेला। अंत में वह जीत गया।

💡 निष्कर्ष:

सही समय पर मिला उत्साह और प्रेरणा व्यक्ति को बड़ी से बड़ी सफलता दिला सकती है।

Comments (0)

0/140

No comments yet. Be the first to share your thoughts!

More from author
» Read more

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

📖 Sanskrit Shloka सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः। (नोट: यह पंक्ति श्लोक 6 का भी भाग है, पर संदर्भ में पुनः उल्लेख होता है) Saubhadro Draupadeyash c...

Mar 27, 2026 34 reads
भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

📖 Sanskrit Shloka काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः।धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः॥17॥ Kashyash cha parameshvasah Shikhandi cha maharathah।D...

Mar 27, 2026 14 reads
भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

📖 Sanskrit Shloka अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः।नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ॥16॥ Anantavijayam raja Kunti-putro Yudhishthirah।Nakulah Sahadeva...

Mar 27, 2026 12 reads
भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

📖 Sanskrit Shloka पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः।पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदरः॥15॥ Panchajanyam Hrishikesho Devadattam Dhananjayah।Paundram...

Mar 27, 2026 17 reads
भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

📖 Sanskrit Shloka ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ।माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शंखौ प्रदध्मतुः॥14॥ Tatah shvetair hayair yukte mahati syandane st...

Mar 27, 2026 11 reads

Most Popular Bhajans

मोहन से दिल क्यों लगाया है ये मैं जानू या वो जाने भजन
119 reads

मोहन से दिल क्यों लगाया है ये मैं जानू या वो जाने भजन

मोहन से दिल क्यूँ लगाया है, ये मैं जानू या वो जानेछलिया से दिल क्यूँ लगाया है, ये मैं जानू या वो जाने ॥ हर बात निराली है उसकी, हर बात में है इक टेढापनटेढ़े ...

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ भजन
86 reads

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ भजन

बड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँबड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदिरवा माँ पावन ज्योति की लागे कतार माई तोरे मंदिरवा माँबड़ी हो रही जय जय कार ओ रही मंदि...

वृंदावन की गलियों में राधे राधे गूंजे
78 reads

वृंदावन की गलियों में राधे राधे गूंजे

वृन्दावन की कुञ्ज गली में मैं राधे राधे गाउंगी,मैं तो श्यामा श्यामा गाउंगी, पहले मैं बरसाने जाऊ,श्याम श्यामा के दर्शन पाउ,फिर वृन्दावन जाउंगी  राधे राध...

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ भजन
67 reads

दुर्गा है मेरी माँ अम्बे है मेरी माँ भजन

दुर्गा है मेरी माँ,अम्बे है मेरी माँ।। जय बोलो जय माता दी, जय हो,जो भी दर पे आए, जय हो,वो खाली ना जाए, जय हो, सबके काम है करती, जय हो,सबके दुखड़े हरती, जय ह...

भगवद् गीता 1.1: अध्याय 1, श्लोक 1
63 reads

भगवद् गीता 1.1: अध्याय 1, श्लोक 1

धृतराष्ट्र उवाच:धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय॥1॥ Dhritarashtra said:Dharmakshetre Kurukshetre samaveta yuyu...

Keep Exploring

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

भगवद् गीता 1.18: अध्याय 1, श्लोक 18

📖 Sanskrit Shloka सौभद्रो द्रौपदेयाश्च सर्व एव महारथाः। (नोट: यह पंक्ति श्लोक 6 का भी भाग है, पर संदर्भ में पुनः उल्लेख होता है) Saubhadro Draupadeyash c...

भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

भगवद् गीता 1.17: अध्याय 1, श्लोक 17

📖 Sanskrit Shloka काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः।धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः॥17॥ Kashyash cha parameshvasah Shikhandi cha maharathah।D...

भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

भगवद् गीता 1.16: अध्याय 1, श्लोक 16

📖 Sanskrit Shloka अनन्तविजयं राजा कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिरः।नकुलः सहदेवश्च सुघोषमणिपुष्पकौ॥16॥ Anantavijayam raja Kunti-putro Yudhishthirah।Nakulah Sahadeva...

भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

भगवद् गीता 1.15: अध्याय 1, श्लोक 15

📖 Sanskrit Shloka पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः।पौण्ड्रं दध्मौ महाशंखं भीमकर्मा वृकोदरः॥15॥ Panchajanyam Hrishikesho Devadattam Dhananjayah।Paundram...

भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

भगवद् गीता 1.14: अध्याय 1, श्लोक 14

📖 Sanskrit Shloka ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ।माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शंखौ प्रदध्मतुः॥14॥ Tatah shvetair hayair yukte mahati syandane st...